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Tuesday, 29 October 2019

आज़मगढ़

तहज़ीब से पेश आना मुझसे
आज़मगढ़ में पली बढ़ी।
गिरेबान पर हाथ जो डालोगे
तो मिट्टी में लाकर पटकूँगी।।

ऋषियों की पावन भूमि है जो
गंगा घघरा के बीच बसा।
मैं उस मिट्टी की उपज हूँ
जहाँ वीरों ने इतिहास रचा।।
छोटे शहर की भले ही हूँ
लेकिन खुद की एक पहचान मेरी।
गिरेबान पर हाथ जो डालोगे
तो मिट्टी में लाकर पटकूँगी।।
तहज़ीब से पेश आना मुझसे
आज़मगढ़ में पली बढ़ी।
गिरेबान पर हाथ जो डालोगे
तो मिट्टी में लाकर पटकूँगी।।

साहस की मुझमें कमी नहीं
अलग करने का कुछ ठाना है।
लक्ष्य मेरा कोई कुआँ नहीं
बड़े समंदर को पाना है।।
समय आए तो बताना है की
मेरे सामने क्या औकात तेरी
गिरेबान पर हाथ जो डालोगे
तो मिट्टी में लाकर पटकूँगी।।
तहज़ीब से पेश आना मुझसे
आज़मगढ़ में पली बढ़ी।
गिरेबान पर हाथ जो डालोगे
तो मिट्टी में लाकर पटकूँगी।।

मैं कोई नाजुक कोमल सी गुड़िया नहीं
ना मैं फूल हूँ गुलाब का
मन भर जाए तो फेक दो मुझको
या कदर न हो मेरे जज्बात का।
मसल के मुझको फेक दो
अफसोस न हो इस बात का
मैं कोई जलती अंगार नहीं
गिर तुझपे तेरी सख्शियत मिटाऊँगी
हाँ गिरेबान पर हाथ जो डालोगे
तो मिट्टी में लाकर पटकूँगी।।
तहज़ीब से पेश आना मुझसे
आज़मगढ़ में पली बढ़ी।
गिरेबान पर हाथ जो डालोगे
तो मिट्टी में लाकर पटकूँगी।।

ऐसा नहीं सिर्फ चामुण्डा हूँ
सती और पार्वती भी हूँ।
जो भी मुझसे प्यार करे
उसके लिए प्रेममयी भी हूँ
रिश्तों की रक्षा करने को
सबसे आगे खड़ी भी हूँ।
ग़र कभी मिटाना चाहो इस
दुनिया से सख्शियत को मेरी
बस एक बात समझले तू
खुद से पहले तुझको मिटा डालुंगी
गिरेबान पर हाथ जो डालोगे
मिट्टी में लाकर पटकूँगी।।
तहज़ीब से पेश आना मुझसे
आज़मगढ़ में पली बढ़ी।
गिरेबान पर हाथ जो डालोगे
तो मिट्टी में लाकर पटकूँगी।।

साँसें

मैं मर रही हर पल
तू जीने की वज़ा दे दे।।
मेरी थम रही हैं साँसें
इन साँसों की बला लेले।।

सोचे क्या जान मेरी
कुछ बातें पुरानी सी हैं
जिस राह चले हम तुम
वो राह अंजानी सी है
कदम बढ़े तो जाएंगे कुछ दूर
अपनी किस्मत से ना होंगे मजबूर
मैं अपना बना लूँ तुझे
मेरी बाहों में पना लेले
मेरी थम रही हैं साँसें
इन साँसों की बला लेले।।

साथ तेरे ही रहूँगी सदा
कभी तुझसे ना होऊँगी जुदा
मेरी दुनिया जहान
मेरे दिल का अरमान
तू मेरा सनम हर दम
चाहे जो भी कसम लेले
मेरी थम रही हैं साँसें
इन साँसों की बला लेले।।

मैं मीरा हूँ तू मोहन
मैं राधा हूँ तू कन्हैया
मेरी ज़िन्दगी की नइया
का तू ही है खेवैया
मैं तेरी बस होके रहूँ
बस इतनी सदा देदे
मेरी थम रही हैं साँसें
इन साँसों की बला लेले।।

चाहने वाले तो तुझे
लाखों हैं हजारो यहाँ
सच भी है तू है ही ऐसा
चाहे तुझे दुनिया जहां
मैं तो बस तेरी प्रेम की प्यासी
मैं तो हूँ तेरे बिन उदासी
तू मेरा हो करम खुदा
अपने दिल में ज़गा देदे
मेरी थम रही हैं साँसें
इन साँसों की बला लेले।।

Saturday, 26 October 2019

इंतजार

कोई खफ़ा है ना मिलने से
कोई उदास है के बात ना हुई
बोल तुझसे मैं क्या क्या होऊँ
के इस विरह में जल के राख हुई।।

दुनिया में देखूँ प्यार ही प्यार
मेरा प्यार न जाने कहाँ खो गया
सोचा था खूब करूँगी प्यार मैं तुझसे
जो सोचा ना कभी वैसा हो गया।
तुझे ढूंढती रही औ तड़पती रही
मेरे सपनों का सारा नूर ले गया
क्या बोलूँ क्या कहूँ ओ हरजाई
मेरी ज़िन्दगी का सारा गुरूर ले गया।।

यादें जो दिल में बसी रह गई
उन यादों में जीना दुश्वार हो रहा
तू माने ना माने तुझसे कह तो रही
तुझसे बेइंतहाँ बेसुमार प्यार हो रहा।।
तू मुझमें रहे औ मैं तुझमें रहूँ
तेरे लौटने का बेसब्री से इंतजार हो रहा।
तू आएगा जरूर मेरे दिल को है यकीन
अभी तेरे बिन ए दिल बिमार हो रहा
अब तेरे बिन जीना दुश्वार हो रहा।।

प्यार है एक बिमारी है
जिसमें डूबी दुनिया सारी है

क्यूँ होता है ऐसा कि
किसी का इंतजार होता है
कोई अजनबी कैसे खुद से
दो चार होता है
आदतें पड़ती हैं छणों में
न छूटने वाली
आने वाला ए कैसा तूफान होता है

Wednesday, 23 October 2019

Love shayries

कोई वक्त नहीं जब तुम याद न आओ
तुम्हीं बताओ मैं किधर जाउंगी
चाह मेरी तुम ही तो थे
तुम साथ नहीं तो मैं मर जाउंगी।।

शून्य हो गई है मेरी चेतना
तुम नहीं तो बताओ क्या हूँ मैं??

तुम क्या थे हम समझ न सके
और तूने हमें समझा ही नहीं।।

कोई बता दे प्यार क्या है
मौसम है हवा है
या उठते हाथों की दुआ है
कोई तो बता दे प्यार क्या है??

हम तो ऐसे न थे जैसा तुमने बना दिया
क्या खता हुई हमसे जो ऐसा बदला लिया।।

हमें तो तुम जैसे ही मिलेंगे
हम जैसा तुम्हें कहीं नहीं मिलेगी
जो छोड़ चले जाओगे हमें ऐसे तो
ढूढने पर हमारी राख भी नहीं मिलेगी।।

हर गली घूमी हर शहर घूमी
तेरी यादों ने पीछा न छोड़ा मेरा
थक न जाऊँ कहीं इस दुनिया से मैं
तू बता कौन है मेरा तेरे सिवा।।

बेशर्म हो गई मैं और मेरी मोहब्बत तेरे लिए
और तुझे तो कुछ फर्क ना पड़ा।।

क्या मिला बता मुझ उड़ते पंक्षी को कैद कर के
और छोड़ा भी तब जब उड़ना भूल गई।।

दर्द मेरा कुछ ऐसा है कि
न सहते बने न किसी से कुछ कहते बने।।

जिसे भूलने में जमाने लगे
वो मिला भी तो अजनबी बनकर
हम देखते रहे नयन भर के
और वो निकला ऐसे राहजबीं बनकर।।

आँखिया थक गई तेरा इंतजार करते
हम मिट गए तुझे प्यार करते
तुम यूँ निकले हरजाई सनम
काश एक बार ही सही प्यार का इजहार करते।।

एक भ्रम है जिसे तोड़ना नहीं चाहती
तू साथ नहीं ये मानना नहीं चाहती
सब कुछ तो खत्म हो गया है मेरा
एक यकीन है जिसे तोड़ना नहीं चाहती।।

याद आया आज वो बीता हुआ दिन
जब तुम साथ थे फिर भी हम अकेले थे।।

हर रोज़ एक अनजाने
सफर की हमसफर हूँ
साथ है जमाने की भीड़
औ मैं सबसे बेखबर हूँ।।

हर तरफ है बस तेरा नज़ारा
मैं भी तेरी दिल भी तुम्हारा
लेने पड़े सौ बार जनम भी
नहीं होगा कोई तुम बिन हमारा।।

एक दर्द सा है सीने में
जो तीर सा चुभता है मन में
कोई दवा नहीं कोई दुआ नहीं
बस साथ चाहिए जीवन में।।

क्या कहूँ किससे कहूँ
न अपना कोई न पराया है
बस दर्द से रिश्ता मेरा
और यही मेरा सरमाया है।।

कहने वाले तो कुछ भी कह दें
एक बार भी नहीं सोचते
सुनने वाला पत्थर का तो नहीं।।

इतना प्यार करूंगी तुझको
खुद पागल हो जाउंगी या
पागल मैं कर दूंगी तुझको।।

कुछ बातें हैं अधूरी
कुछ बातें अनकही सी
तू भी रहा खामोश
हमने भी ना कुछ कही थी
वक्त था चला गया
बस याद है तेरी छवी ही।।

तुम्हारा एक छण का मुस्कुराना
दिल में ख्वाहिशें जगाता है हजार
जब ना उम्मीद हो जाती हैं ख्वाहिशें
तो एक छण को क्यूँ मुस्कुरा जाते हो यार।।

Love shayries

इस बेगानी दुनिया में
न जाने हम क्या हो गए
हमसफर ढूढते रहे
और हम ही खो गए।
न मिले तुम
न खुद को ढूढ पाए
तन्हा सफर है
अब कैसे जिया जाए।।

दुनिया की भीड़ है
भीड़ का मेला है
लाखों हैं साथ फिर भी
ए दिल अकेला है।।

जब दर्द हद से बढ़ जाए
खून के आँसू दिल से बाहर आए
तो शेयर करो किसी अजनबी से
जो तुम्हें जानता न हो
क्योंकि दर्द में हँसने वाले अक्सर
पहचान वाले ही होते हैं।।

डर लगता है तुम जैसे भँवरे से
हम फूलों की हस्ती ही मिटा देते हो
फिर भी सोचते हो अहसान किया हम पर
जो हमें खुद से ही चुरा लेते हो।।

जो तुम न मिलते तो कहाँ जाते
इस अंधेरी दुनिया में कहीं खो से जाते
तुम मिले तो साथ हम भी कदम बढ़ा दिए
वर्ना तुम्हारे इंतजार में उम्र भर के लिए यहीं सो जाते।।

मुझे पास्ट नहीं बनना था यार
खुद से ज्यादा करती हूँ तुमसे प्यार
क्यों अहसास नहीं होता तुझे मेरी मोहब्बत का
एकबार कह तो सही तेरे लिए छोड़ दूँ ए दुनिया संसार।।

अजीब है तुम्हारा अहसास।
इग्नोर करते हो फिर भी
मन खिचा जाता है तुम्हारे पास।।

दिल मेरा पतंग है और डोर तेरे हाथ में
उडूँ आसमाँ में और रहूँ तेरे साथ में
डर लगता है मुझे भी तुझसे दूर होने से
ग़र गिरूं आसमां से तो मिलूँ तेरे पाथ में।।

किस अजीयत से गुजर रही
तुझे नहीं है खबर।
सामने है दुनिया
और मैं हूँ बेखबर।।

तुम्हें क्या पता के मैं कैसे जी रही हूँ।
तूने आग लगाई और मैं अब तक सुलग रही हूँ।।

चाहा तो बहुत के भूल जाएं तुम्हें
तुम हो कि भूलते नहीं....

Monday, 14 October 2019

एक गलत और दूसरा सच्चा

एक गलत और दूसरा सच्चा

एक बाप बेटी की कहानी
जो आप सबको है सुनानी।

चंचल सी नादान
दुखों से थी अंजान।
भोली सूरत और मासूमियत
उसकी थी पहचान।।

होश संभाला जबसे।
देखा पापा की आँखों में
सपने पलते हैं कब से।।

बीता बचपन आई जवानी
पापा के सपने की बनी कहानी।
एक दिन वो वक्त भी आया
जब सपने ने रंग दिखाया।

खुशियाँ घर में बरसने आई
चारो तरफ छाई खुशहाली।
पर किस्मत ने ना साथ दिया
और सब को बर्बाद किया।
हार तबाही सब कुछ लाई
अपने संग ले गई खुशहाली।।

बेटी ने देखा पापा को
टूटते और बिखरते खूब।
कुछ कर सकती ना थी
उसमें क्षमता ना थी भरपूर।।

फिर समय ने करवट बदला।
समय कुछ आया ऐसा अगला।
बेटी ने संकल्प लिया
कुछ करने की ठान लिया।

बेटी के भी खुद के सपने थे
जिनको उसने भी पूरे करने थे।
राह निकाली कुछ ऐसी उसने
जिससे पूरे हों दोनों के सपने।

ग्लैमर की दुनिया है ऐसी
जिससे क्यूँ डरते हैं सभी
चकाचौंध की इस दुनिया में
उसे बनानी थी पहचान अभी।।

सपने जो देखे बेटी ने
ना मंजूर किये सभी ने।
पर जिद थी कुछ करने की
सबके लिए ए बात थी डरने की।।

किस्मत ने एक खेल रचाया
बेटी को ग्लैमर की नगरी पहुँचाया
पापा को चिंता बेटी की
उसकी सुरक्षा की सेक्योरिटी की।

बेटी की सुरक्षा के कारण
स्वांग रचाया गुस्से का।
बेटी भी कम ना थी
सच जानती थी इस रिश्ते का।।

अपने सपने के माध्यम से
पापा का सपना पूर्ण करूँ
दुनिया ने भी अपना रोल निभाया
जो भी हो आखिरी दम तक लडूँ।।

मोह प्रेम संकल्प खेल में में
पापा बेटी दो मोहरे थे।
दुनिया वाले रोड़े अड़चन
रिश्ते उनसे भी दोहरे थे।।

पापा चाहे बेटी की सुरक्षा
बेटी पूरी करना चाहे पापा की अकांक्षा
दोनों अपनी राह पर सच्चे
दोनो की है सच्ची मंशा।
फिर एक गलत कैसे दूसरा सच्चा।।।

रात के अंधियरिया पिया



रात के अंधियरिया पिया
चाँदनी बा रतिया पिया

बिरह हमरो साथ में बा
औ साथ ना सँवरिया पिया।

दिन त बीत जाए कैसो
रात ना गुजरिया पिया

आँसुवन के धार बहे
कवनों ना असरिया पिया

छूटै सारी दुनिया मोसे
तू ही ना छूटइया पिया

हाथ में लकीर तोरी
फिर भी ए जुदइया पिया

मन मारी जियतानी
हम त हरजइया पिया

तू जो परदेशी भइला
हम भई जोगनिया पिया

love shayries

ये जो बारिशें हैं गवाह हैं मेरी मोहब्बत की
ये पानी की बूंदें नहीं मेरी आसुओं की धारा हैं
बेहद होती है ये मोहब्बत
हदें तो अपने तोड़ते हैं।।

जो आइना मिला होता
तो देखती खुद की सूरत
कि तेरे प्यार में
कितना बदल गई हूँ।।

अफसोस ग़र होता
तुझसे प्यार करने का
तुझे भुलाने के लिए
खुद को मिटा लेती...

इश्क तनहाइयों का
उपहार दे गया
तनहा तो पहले भी थे
पर दर्द न था...

तूने बदल दी मेरी दुनिया
यूँ मेरी दुनिया में आकर
कभी सोचा था
बदलाव कितना महंगा है...

मासूम से चेहरे पर
चंचल सी निगाहें
इसी निगाहों में
बसाया है तुम्हें...

चल रहे थे हम खुशी में झूमते मस्ती में
आदत लगा दी साथ की तो
तनहाइयों से डरने लगे...

हाथ को पकड़ लो मेरा
डूबने से डर रही
गहराई इतनी ज्यादा है के
डर डर के उतर रही...

साथिया तेरे प्यार की
हर एक कस्म याद है
जो तू भूल गया तो
इसमें मेरी खता क्या...

किसी को चाहने का कोई बहाना नहीं होता,
दिल लगाने से कोई दिवाना नहीं होता।
आशिकी सीखनी है तो सीखो हमसे,
हमें पता है मोहब्बत का मतलब पाना नहीं होता।।


दुनिया छोड़ कर आऊँ मैं तेरे पास सजना
तू कर तो सही मेरा इंतजार सजना
दुनिया की जंजीरों ने
यूँ जकड़ा है बेरहमी से
हौसला कर तोड़ दूँगी
तू कर तो इजहार सजना।।
दुनिया छोड़ कर आऊँ मैं तेरे पास सजना
तू कर तो सही मेरा इंतजार सजना

love shayries

तेरी आदत जो पड़ गई है मुझे
जैसे लत लगी हो शराब की।
मैं जागती अंधेरी रातों में क्यों
जरूरत है बस तेरे जवाब की।।

तेरे बिना ओ मेरे साँवरिया
ये दुनिया अच्छी लगती नहीं
मैं कब थिरकूँगी ताल पर तेरी
इंतजार की घड़ियाँ बीतती नहीं।।
घूम फिर कर मेरी नज़रे क्यूँ
तुझपे ही आके ठहरती हैं।
जैसे तुझ सा कोई नूर नहीं
दिल में बस एक यही बात रहती है।।
मैं कागज का कोरा टुकड़ा
तूने नाम जो अपना लिख डाला है।
इस जनम में मैं बस तेरी हो गई
बस तू ही मेरा रखवाला है।।
मैं शब्दों की जंजीर में उलझी
खुद की बातें क्या कह पाऊँगी।
जाते जाते ग़र सोचा होता
क्या तेरे बिना मैं रह पाऊँगी।।
मैं पत्थर हूँ कोहिनूर नहीं
जो दिलों पर मैं राज करूँ।
खुद की दुनिया जब उजड़ चुकी
तो औरों को क्या आबाद करूँ।।
रंगरलियों की आदत हो जिन्हें
उन्हे जल तो फीका लगता है।
रंगों की तो बात क्या करना
जल में ही मिलकर रंगता है।।
सरसराहटें हैं कपकपाहटें अजीब है
इश्क की हवा में कुछ बातें अजीब हैं।
तेरे होने का अहसास जो कराती है मुझे
बेहोशी का है आलम फिर भी चाहतें नसीब हैं।।
दूरियाँ ये फासले ग़र कम न हो सकें तो क्या
तेरे मेरे इश्क के ग़र फूल न खिल सकें तो क्या।
हाथ में गर हाथ तेरा, फिक्र फिर किस बात की
चाहतें हजार हैं, ग़र पूरी न हो सकें तो क्या।।
प्यार की मुलाकात होगी ग़र कभी सनम
चाहतें हजार होंगी बातें भी ना होगी कम।
धड़कनों का राज होगा होंठों पर भी राज होगा
तो क्या हो ग़र मिल के भी ना मिल पाएं हम?
तेरी तस्वीरों को छिपा के रखा है
जैसे छिपाया हो कोई खजाना।
खोल कर देखती भी तभी हूँ
जब सो जाता है सारा जमाना।।
शोर उठता है जो दिल के तूफान का
कहे कोई मेरी बर्बादी के बखान का
हर एक छण बीत रहा तेरी जुदाई में
कोई रास्ता ही बता दे श्मशान का..
क्यूँ हर दुआ में शामिल तेरा नाम है
तेरे बारे में सोचना मेरा बस काम है।
प्यार में होता है अक्सर ये क्यूँ बता
जलता है कोई, होता बदनाम है।।

Love shayries

इश्क हमने किया पागलों की तरह
तुम ना समझे ये कैसी बेज़ारी है।
दिल तुम्हारे ही नाम पर धड़कता रहा
ये खता थी मेरी या कोई बिमारी है।।
मैं तुम्हारे लिए ऐसी जोगन बनी
औ तड़पती रही कि दुनियादारी है।

चल आज तुझे मैं याद करूँ
अपनी सारी ज़िन्दगी तेरे नाम करूँ
तू बेवफा निकला तो क्या हुआ
तुझ पर ही ए ज़िन्दगी कुर्बान करूँ।।

पिया काहें ना अइलो

दिल में बसा के हमके जिन्दगी बनइलो
काहें ना अइलो पिया काहें ना अइलो।।

सारी सारी रात पिया याद तोरि आवे
दिल में हिलोर उठे जियरा जरावे।
मन के अगन पिया काहें ना बुझइलो
काहें ना अइलो पिया काहें ना अइलो।।

तोरि तिरिया के लोग मारे ताना
तोके बिसरावे के मिले ना बहाना
बुझत मोरि जिनगी के काहें ना जियइलो
काहें ना अइलो पिया काहें ना अइलो।।

सब छोड़ि छाड़ी मन जोगन बनेके कहे
तोहरे बिरह मन अब ना जले के सहे
मन मोरा पंछी बहुत काबू कइलो
काहें ना अइलो पिया काहें ना अइलो।।

दिल में बसा के हमके जिन्दगी बनइलो
काहें ना अइलो पिया काहें ना अइलो।।

अब परिवर्तन चाहिए

अब परिवर्तन चाहिए


सिर्फ शरीर नहीं थी रे मैं

मुझमें भी तुझसी चेतना है।
मैं माँ बेटी बहन थी तेरी
फिर दिल में कैसी वेदना है।।

जन्मदात्री इस दुनिया की

धरती सा सौभाग्य मेरा।
अंकुरण की छमता है मुझमें
और यही बना दुर्भाग्य मेरा।।

अगर लेना हो बदला मुझसे

और दिखाना हो नीचा।
शरीर मेरा एकमात्र विकल्प
तेरा कोई हाथियार न दूजा।।

गर लड़ते दिमाक से मुझसे

तो बराबर टक्कर देती।
शक्ति से जो लड़ते तुम तो
दमभर अपने कोशिश करती।।

पर तुमने जो राह चुनी

क्या शक्ति बुद्धि से हीन हुए।
क्या बर्बरता के चरम शिखर पर
कायरता के आधीन हुए।।

थप्पड़ का बदला थप्पड़ हो

गाली का बदला गाली।
पर बलात्कार है किसका बदला
ये बात समझ ना आई।।

सीरियल्स में देखा है मैंने

हाथ पकड़ते सरे राह सभी।
होती फिर हीरो की एंट्री
गुण्डे जाते भाग सभी।।

हकीकत की दुनिया में तो

कभी न हीरो आता है।
ग़र कोई कोशिश भी करे
तो राहों में फिक जाता है।।

यहाँ तो हीरो होते ही नहीं

जो गुण्डों से बचाए कभी।
ग़र होते हीरो भी यहाँ
न होतीं रेप सी सजाएं कभी।।

बात खत्म नहीं है यहीं

हर सौदे का सौदागर स्त्री।
बिकती सरे राह नज़रों से देखो
हर घर की इज्जत और लक्ष्मी।।

सौदा हो तो शरीर से करना

बदला भी शरीर से लेना।
नीचा भी शरीर गिराती
बेइज्जती भी शरीर की होती।।

वजह क्या होती रेप के पीछे

कामुकता या बदला।
माँ बहन को देख के फिर
क्यूं नहीं जागती भावना।
और बदला शरीर से ही क्यूँ
कोई कुछ तो कहो ना।।

क्या पुरुषत्व नष्ट हो गया

या नष्ट हो गई चेतना।
या मर्द हो गया है कायर
या भूल गया है लड़ना।।

सुन्दरता का प्रतीक है स्त्री

माना गुलाब का फूल है स्त्री।
फूल तो डाली पर खिलते हैं
सुगन्ध बिखेर हिलते डुलते हैं।।

ग़र सोचो कोई तोड़ के मसल दिया तो

छण भर को महकेंगे हाथ।
गुलाब का स्तित्व मिट जाएगा
कुछ ना बचेगा उसके पास।।

मिट्टी तो होना था एक दिन

पर ऐसे मसले जाना।
बर्बरता की हद ही तो है
यह रूप ना कोई पहचाना।।

सुन्दर हूँ आँखों में भर लो

मन में और यादों में रख लो।
शरीर मेरा कोई वस्तु नहीं
जिसका तुम सौदा कर लो।।

आधी आबादी तुम भी हो

आधी ही आबादी मैं भी हूँ
न तुम शरीर न मैं शरीर
समझो इंसान ही मैं भी हूँ।।

तुम कौन

देखा था जब कोई और समझ कर
जाना जब तुम कौन हो।
सोचा न था तुम मिलोगे कभी
जब मिले भी तो तुम मौन हो।।

तुम वो निकले जो चाह मेरी थी
पर तुमने राह बदल ली है।
देर हो गयी हमको मिलने में
तुमने मंजिल पकड़ ली है।।

वही नूर वही रंग तेरा
जो सपनों का राजकुँवर मेरा।
अब और नगर का वासी तू
कहीं और होगा शहर मेरा।।

Love shayries

इस दुनिया में मैं आई थी शायद तेरे लिए
अब भटक रही यूँ तनहा गलियों में।
भ्रम था मेरा या थी मेरी भूल
जो लगा मिले हैं हम यूँ शदियों में।।

तू बेरहम निकला कदर नहीं की मेरी
मैं मानती रही तू जिन्दगी है मेरी।
चाहती रही मैं पागलों की तरह तुझे
तूने अहसास कराया के भूल थी मेरी।।

तुझसे प्यार क्या हुआ ज़िन्दगी हराम हो गई
मैं ढूढती रही तुझे और खुद ही गुमनाम हो गई।
सोचा था प्यार भरे लम्हें गुजारेंगे हम भी तेरी बाहों में
नज़र किसकी लगी कि सोचते ही बदनाम हो गई।।

कितनी नफरत है तेरी आँखों में
जो झलकती है तेरी बातों में।
हमने तो बस प्यार किया था
और बहते रहे जज्बातों में।।

नफरत तो मुझसे करता है
गुनाह तो बताया होता
क्या नादानी अपराध मेरा
या तुझसे प्यार करना।।

खुश है दिल तोड़के मेरा क्यों
क्या खिलौने दिलों के इतने सस्ते हैं...।

वो प्यार था मेरा अब अहसास बन के रह गया
और तू छोड़ के चला गया है 
तो देखले अभी भी  साँसें चल रहीं
अभी भी हम जिन्दा हैं।

मेरी मोहब्बत की कदर ना करी तूने
अभी तूने ये क्या किया।
हम ईश्वर मान कर तुझे पूजते रहे
तूने मेरी आस्था ही छीन लिया।।

क्या कहें कि तू कितना याद आता है
जुड़े जब हाथ मेरे हर दुआ में तेरा नाम आता है।
चाहत है बस सिर्फ तुझे ही एक पाने की
क्या याद करते तुझे तेरा दिल भी धड़क जाता है।।

छोटी सी प्रेम कहानी में
सारे रंग देख लिए मैंने तेरे
फिर भी तुझ बिन मेरी ज़िन्दगी
बेरंग हुए जाती है।

उसने क्या सोच कर मिलाया मुझे तुझसे
जब मिला कर बिछड़ाना ही था
वजह भी कुछ ऐसी दिया कि
बिछड़ के भी बनना तेरा दिवाना ही था।।

ऐसी प्रेम कहानी 
कोई सुना होगा क्या
दूर है प्रियतम
और प्रेयसी सारी दुनिया है..।

अभी तेरे प्यार में
क्या क्या सहेंगे और।
मीरा नहीं राधा नहीं
अरुभी बनेंगे तेरी ठौर।।

तेरे बारे मेंं अब और क्या कहें
तू आता है सोच में तो
धड़कनें बढ़ जाती हैं
साँसें रुक जाती हैं
सच में आया तो
मर ही जाऊँगी मैं...

तू रूठा है तो मना लूँगी
बस नफरत ना कर मैं मर जाऊँगी।
तू ही जीने का सहारा है
तेरे बिना मैं किधर जाऊँगी।
चल छोड़ गुस्सा आ पास मेरे
तेरे साथ ही मैं सँवर जाऊँगी।
गर छोड़ दिया जो साथ मेरा
अभी तेरे बिना मैं बिखर जाऊँगी।।


तेरे काबिल ही न थी

मैं तो तेरे काबिल ही न थी
पर तूने क्यों यह रोग दिया।
मैं भूल गयी खुद की हस्ती
तूने क्या यह जोग किया।।

मैं तितली थी एक स्वच्छ गगन की
तूने कैदी क्यूं बनाया मुझे।
फूलों की ही बस प्यास  थी
बगिया का सपना क्यूं दिखाया मुझे।।

तू माली है या भँवरा है
या एक नादान बच्चा।
तू माने या न माने
मेरा अहसास बिलकुल सच्चा।।

मुझे बहुत आ रहा रोना

खाली खाली लगता है
मेरे दिल का हर कोना।
एक दर्द सा है सीने में
मुझे बहुत आ रहा रोना।।

क्या भूल हुई जो छोड़ दिया
मैं तड़प रही तू क्यूँ मुहँ मोड़ लिया।
एक बार तो गलती बता दे मेरी
तुझे नहीं चाहती मैं खोना।।
मुझे बहुत आ रहा रोना।।

तू तो गया मेरी जान भी ले गया
एक बार न सोचा कि मेरा क्या होगा।
मैं एक जिन्दा लाश बन गयी
अब चाहती हूँ हमेशा के लिए सोना।।
मुझे बहुत आ रहा रोना।।

एक बार गर जानते मुझको
कि तू ही मेरी धड़कन है।
अब तो बस साँस चल रही
अब भी तो कुछ कहो ना।।
मुझे बहुत आ रहा रोना।।।

तू क्या जाने

तू क्या जाने जब किसी को मान लो दिल से अपना जब बन जाये बस वही आखिरी सपना तो अधूरेपन का अहसास होता है जब वो नहीं अपने साथ होता है। तू क्य...