नहीं चाहिए आसमान की बुलंदी
नहीं करनी पुरुषों की बराबरी
नहीं बनना ख्वाबों की रानी
नहीं कहलाना घर की हूँ मालकिनी
मैं औरत हूँ मुझे औरत ही रहने दो
मेरा आत्मसम्मान मेरे पास रहने दो
मजबूत हूँ या कमजोर हूँ फर्क नहीं पड़ता
बस शरीर नहीं हम यह समझने दो।
चेतना है आत्मा है इच्छा भी है
कुछ अलग करने की मंशा भी है
पहचान की अपनी लड़ाई लड़ते रहे
पुरुषों की दुनिया में खुद को बचाने की चिंता भी है
पुरुषों की कहाँ
ये दुनिया हमारी भी आधी थी
पुरुषों की तरह
हम भी आधी आबादी थीं
जाने कब कैसे क्या हो गया
हम बस एक शरीर बन गयीं
पुरुषों की जागीर बन गयीं
फ्रीडम फेमिनिस्ट का राग अलापती
खुद स्वतंत्र स्वच्छंद बताती
कह दो क्या सत्य है
क्या नारी सच में स्वतंत्र है???
Translate
Thursday, 4 April 2019
शिकायत
कुछ सवाल जो तुमसे करने थे
कुछ जवाब जो तुमसे लेने थे
क्यूं पागल कर दिया, बोलो तो सही
इसके हिसाब भी तुमसे लेने थे।।
दिखाया सपना जन्नत का
क्यूं धरती पर ला पटका है
मैं टूट के चकना चूर हो गयी
जैसे मिट्टी का कोई मटका है।।
मैं भी थी एक नन्ही कली
क्यूं मसल मसल कर कुचल दिया
इसके हिसाब भी तुमसे लेने थे।।
प्यास तो थी हम दोनों की ही
सिर्फ मेरा ही गला क्यूं सूख रहा
तू हूर नहीं तू नूर नहीं, फिर
दिल मेरा तुझे ही क्यूं ढूढ रहा।।
बिरह की आग में झुलसती मैं
क्यूं तड़प रही तिल तिल मरके
इसके हिसाब भी तुझसे लेने थे।।
अब खतम कहानी तेरी मेरी
जो शुरू किया नहीं कभी तूने
एक छलावा था एक खेल भी था
पर प्यार ही समझा हमेशा मैंने।।
क्यूं खेल की बाजी मुझे समझा
और खेल गये दिल से मेरे
इसके हिसाब भी तुझसे लेने थे।।
कुछ जवाब जो तुमसे लेने थे
क्यूं पागल कर दिया, बोलो तो सही
इसके हिसाब भी तुमसे लेने थे।।
दिखाया सपना जन्नत का
क्यूं धरती पर ला पटका है
मैं टूट के चकना चूर हो गयी
जैसे मिट्टी का कोई मटका है।।
मैं भी थी एक नन्ही कली
क्यूं मसल मसल कर कुचल दिया
इसके हिसाब भी तुमसे लेने थे।।
प्यास तो थी हम दोनों की ही
सिर्फ मेरा ही गला क्यूं सूख रहा
तू हूर नहीं तू नूर नहीं, फिर
दिल मेरा तुझे ही क्यूं ढूढ रहा।।
बिरह की आग में झुलसती मैं
क्यूं तड़प रही तिल तिल मरके
इसके हिसाब भी तुझसे लेने थे।।
अब खतम कहानी तेरी मेरी
जो शुरू किया नहीं कभी तूने
एक छलावा था एक खेल भी था
पर प्यार ही समझा हमेशा मैंने।।
क्यूं खेल की बाजी मुझे समझा
और खेल गये दिल से मेरे
इसके हिसाब भी तुझसे लेने थे।।
काश के मैं लड़का होती
काश के मैं एक लड़का होती
होते सपने मेरी मुट्ठी में।
न मैं एक शरीर होती
न ही मैं घर की इज्जत होती
न ही मैं कमजोर होती
न कभी ए जिल्लत होती
काश के मैं एक लड़का होती
होते सपने मेरी मुट्ठी में..
न छूतीं नजरें किसी की
न कोई घुटन होती
मंजिल मेरी जो भी होती
मैं सिर्फ इंसां होती
हक होता मेरा भी इस दुनिया पर
मेरा भी एक जहां होता
काश मैं एक लड़का होती
होते सपने मुरी मुट्ठी में।।
होते सपने मेरी मुट्ठी में।
न मैं एक शरीर होती
न ही मैं घर की इज्जत होती
न ही मैं कमजोर होती
न कभी ए जिल्लत होती
काश के मैं एक लड़का होती
होते सपने मेरी मुट्ठी में..
न छूतीं नजरें किसी की
न कोई घुटन होती
मंजिल मेरी जो भी होती
मैं सिर्फ इंसां होती
हक होता मेरा भी इस दुनिया पर
मेरा भी एक जहां होता
काश मैं एक लड़का होती
होते सपने मुरी मुट्ठी में।।
उड़ान इस स्वच्छ गगन में
पूरा आसमान मेरा भी होता
कहलाती आधी आबादी
पर पूरा अधिकार मेरा ही होता
मैं जो चाहती वो कर जाती
कोई रोक न टोक होती
काश की मैं लड़का होती
होते सपने मेरी मुट्ठी में।
पर क्या मैं भी ऐसी ही होती
जैसे मिलते है रोज मुझे
क्या चाहती मैं भी छूना
हर रोज नया अहसास मैं लेती
तर करती मैं आँखें और मन
जज्बातों की परवाह बिना
क्या मैं भी समझौते करती
सपनों के जज्बातों के
अहसासों के वादों के...
फिर भी काश की मैं लड़का होती
तो होते सपने मेरी मुट्ठी में।।।
कुछ तो कहा होता
कुछ तो कहा होता
कुछ तो कहा होता
दिल ने सुना होता।
कुछ अनसुना अहसास
दिल को छुआ होता।।
तुम आसमां से नूर
चुरा चुरा के लाते
सीपियों से मोती
छुपा छुपा के लाते
मैं झूमती खुशी से
मन खुश हुआ होता।
कुछ अनसुना अहसास
दिल को छुआ होता।।
मैं ख्वाबों की रानी
तुम सोलमेट होते
मैं ज़मीं होती
तुम आसमां होते
बरसाते प्यार की बूंदे
मनमोर मगन हुआ होता।
कुछ अनसुना अहसास
दिल को छुआ होता।।
मैं साँस होती और
धड़कन बन जाते तुम
नाम बनते और
पहचान बन जाते तुम
मेरे जीने मरने का
आधार बन जाते तुम
बस तुम ही तुम होते
तन झूम झूम जाता।
कुछ अनसुना अहसास
दिल को छुआ होता।।
मैं बस तुम्हारे एक
अहसास को जीकर
शुक्र करती उम्र भर
आँसुओं को पीकर
करती गिला ना कभी
ग़र कुछ किया होता।
कुछ अनसुना अहसास
दिल को छुआ होता।।
कुछ तो कहा होता
दिल ने सुना होता।
कुछ अनसुना अहसास
दिल को छुआ होता।
Subscribe to:
Posts (Atom)
तू क्या जाने
तू क्या जाने जब किसी को मान लो दिल से अपना जब बन जाये बस वही आखिरी सपना तो अधूरेपन का अहसास होता है जब वो नहीं अपने साथ होता है। तू क्य...
-
KAALA ISHQ Cast – Madhukar 25 (writer Archana yadav R...
-
तू क्या जाने जब किसी को मान लो दिल से अपना जब बन जाये बस वही आखिरी सपना तो अधूरेपन का अहसास होता है जब वो नहीं अपने साथ होता है। तू क्य...
-
viuh viuh e;kZnk,a ßcjlk csVk lc lkeku Bhd ls j[k yks dqN Hkwyuk ugha ]ugh rks ijs ” kku gks tkvksxh dSls eSust djksxh...