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Thursday, 4 April 2019

क्या नारी सच में स्वतंत्र है

नहीं चाहिए आसमान की बुलंदी नहीं करनी पुरुषों की बराबरी नहीं बनना ख्वाबों की रानी नहीं कहलाना घर की हूँ मालकिनी मैं औरत हूँ मुझे औरत ही रहने दो मेरा आत्मसम्मान मेरे पास रहने दो मजबूत हूँ या कमजोर हूँ फर्क नहीं पड़ता बस शरीर नहीं हम यह समझने दो। चेतना है आत्मा है इच्छा भी है कुछ अलग करने की मंशा भी है पहचान की अपनी लड़ाई लड़ते रहे पुरुषों की दुनिया में खुद को बचाने की चिंता भी है पुरुषों की कहाँ ये दुनिया हमारी भी आधी थी पुरुषों की तरह हम भी आधी आबादी थीं जाने कब कैसे क्या हो गया हम बस एक शरीर बन गयीं पुरुषों की जागीर बन गयीं फ्रीडम फेमिनिस्ट का राग अलापती खुद स्वतंत्र स्वच्छंद बताती कह दो क्या सत्य है क्या नारी सच में स्वतंत्र है???

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