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Wednesday, 19 February 2020

हाँ मैं मीरा हूँ

हाँ मैं मीरा हूँ
मीरा के जैसी हूँ
हाँ मैं मीरा हूँ...

कन्हैया सा मेरा प्रियतम दूर है
मैंने भी बस देखी तस्वीर है
कन्हैया सा है रंग साँवरा
दिल में मेरे बस उसी की पीर है

हाँ मैं मीरा हूँ
मीरा के जैसी हूँ
हाँ मैं मीरा हूँ...

मीरा के जैसी हूँ मैं प्रेमदिवानी
चाह मेरी भी किसी ने न जानी
पागल पागल घूमूँ मीरा सी
मीरा सी है मेरी कहानी

हाँ मैं मीरा हूँ
मीरा के जैसी हूँ
हाँ मैं मीरा हूँ...

मीरा सी ही बिरह की मारी
मीरा सी मैं भी दुखियारी
प्रियतम को मैंने खुदा है माना
भूल गई मैं भी दुनियादारी

हाँ मैं मीरा हूँ
मीरा के जैसी हूँ
हाँ मैं मीरा हूँ...

रोज ही पीती ज़हर का प्याला
नहीं कोई मेरा रखवाला
प्रियतम मेरा दूर बसा है
दिल भी मैंने उसी पर हारा

हाँ मैं मीरा हूँ
मीरा के जैसी हूँ
हाँ मैं मीरा हूँ...

बिरह को गीत पिरोती रहती
तेरे लिए बस रोती रहती
तू क्या जानें प्रीत मेरी
तेरे बारे में बस सोचती रहती

हाँ मैं मीरा हूँ
मीरा के जैसी हूँ
हाँ मैं मीरा हूँ...

कृष्ण प्रेम में मीरा पागल
मैं भी पागल हो जाऊँगी
मीरा तो गोलोक गई
क्या मैं भी तुझको पा पाऊँगी

हाँ मैं मीरा हूँ
मीरा के जैसी हूँ
हाँ मैं मीरा हूँ...

Tuesday, 4 February 2020

एक टच से

मैसेज मैंने लिख लिया
जो कहना था कह दिया
कुछ बातें अभी जो बाकी थीं
वो सारी बातें लिख दिया
तुझ तक पहुँचती वो सारी बात
दूर हैं बस एक टच से।
तू फिर से ब्लॉक कर देगा मुझे
डरती हूँ बस इसी सच से।।

कितनी बार मैसेज लिखा और डिलीट किया
कितनी बार मैंने खुद पर कंट्रोल किया
कितनी बार आखिरी ज़द का सोचा
और कितनी बार कमजोरदिल को मजबूत किया
खत्म हो जाता ये सब, पर पता नहीं
क्यों इतना डरती हूँ बस एक टच से।
इसलिए कि तू फिर से ब्लॉक कर देगा मुझे
हाँ डरती हूँ बस इसी सच से।।

एक समय था जब तुझे ऑनलाइन देखकर
धड़कनें तेज हो जाती थी
और तेरे सोचने से पहले मैं मैसेज
और कॉल कर जाती थी
आज वो समय है जब 24/7
रहता है तू मेरे दिल में
फिर भी तुझे एक मैसेज करने से पहले
क्यूँ इतना डर जाती हूँ
कि मैसेज हजारियों बार लिखती
और डिलीट कर जाती हूँ
क्या पता तुझे कितना मुश्किल है
खुद को दूर करना इस टच से।
पर तू फिर से ब्लॉक कर देगा मुझे
डरती हूँ बस इसी सच से।।

क्या तुम वही हो जिससे
होती थी घण्टों बातें
और बिना प्लानिंग के
अक्सर हो जाती थी मुलाकातें
मुलाकातें नहीं वो
सपना था जो पाले थे मैंने
तेरी याद में क्या कहूँ
कैसी बीतती थी मेरी रातें
अब देख ना सब कुछ बदल गया
अब दूरी भी नहीं मिटती टच से।
क्योंकि तू फिर से ब्लॉक कर देगा मुझे
मैं डरती हूँ बस इसी सच से।।

तू क्या जाने

तू क्या जाने जब किसी को मान लो दिल से अपना जब बन जाये बस वही आखिरी सपना तो अधूरेपन का अहसास होता है जब वो नहीं अपने साथ होता है। तू क्य...