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Friday, 27 December 2019

Love shayries

अभिषेक अभिराम अभिमान था मेरा
बचपन से सजाया वो अरमान था मेरा।
चंद लमहों में दुनिया विरान हो गई
शायद यही ज़िन्दगी का इम्तहान था मेरा।।

अब हाल मेरा कोई क्या पूछे
कोई तो मुझमें मुझको ढूढे
खोई हूँ कबसे पता नहीं
कब शाम ढली कब दिन डूबे।

जोगन सी फिरती भटकूँ विरही
कोई आस नहीं कोई राह नहीं
कबसे मंजिल भी मेरी गुम हुई है
दिल में भी जीने की कोई चाह नहीं

हर रूप तेरा मैंने देख लिया
क्या कहूँ के कैसा रोग लिया
जो जानती मैं तेरी मंशा
करती ना कभी जो अभी किया।।

Wednesday, 25 December 2019

मैं भी एक लव स्टोरी जीना चाहती हूँ

मैं भी एक लवस्टोरी जीना चाहती हूँ
पर लव करने वाला कोई मिला नहीं
शरीर की चाह के तो बहुत मिले
पर मुझे चाहने वाला कोई मिला नहीं...

इंतजार आज भी उस दिव्यपुरुष का
जो मेरा हो मेरे जैसा हो
खास उसमें कुछ नहीं चाहिए
बस मेरे शिव के जैसा हो
पर भीड़ के इस विशाल समंदर में
मुझे मुझ जैसा कोई मिला नहीं...

मिले बहुत इस इंतजार की राह में
बोले ब्वायफ्रेण्ड बनना चाहूँ मैं
मैंने तो कुछ को मौके भी दिए
मिला नहीं जिसे दिल से चाहूँ मैं
कहीं भूल तो नहीं गया पैदा होना
आह! तब तो फिर कोई गिला नहीं....

प्यार का नाटक रोज मैं देखती
नाटक... हाँ नाटक ही तो है
जिस प्यार की नुमाइश होती
वो प्यार नहीं दिखावट ही तो है
कपल्स को देख कर चिढ़ होती
तो क्या मेरे लिए कोई बना नही...

जिस दिन आया मेरी ज़िन्दगी में
एक डण्डा उठा कर बहुत मारूँगी
लूँगी बीते दिनों के सारे हिसाब
और सारी कसर निकालूँगी
पर कब आएगा नहीं खबर
कोई खबरी अब तक मिला नहीं...

दिन डूब चुका अब रात ढ़ल रही
तेरे इंतजार में मेरी जां निकल रही
बरसों बरसों तो बीत गये
अब तो आ जा मेरी साँस थम रही
मेरी थमती साँसों को रोकने वाला
कोई वैद्य आज तक मिला नहीं...

Monday, 23 December 2019

भाई नहीं हूँ मैं तुम्हारा

भाई नहीं हूँ मैं तुम्हारा
ये सिर्फ एक वाक्य नहीं
ब्रह्मास्त्र था
जो फेका था तूने मुझ पर
परास्त हो गई न जाने कैसा
आस्त्र था...

कितनों ने मारे यही डायलॉग कई बार
जब भी कोई और कहे तू याद आया हर बार
पता नहीं क्यूँ सच माना तब तेरी बात को
और रोग लगा लिया मैंने उसी रात को

Sunday, 22 December 2019

एक लड़की

लगता था मुझ सा कोई दुखी नहीं
आज देखा जो अंदर उसके झाँककर
तो उस सा दुखी कोई है ही नहीं...

कोई मिला उसे भी उस घड़ी
दुनिया थी एक तरफ और वो थी अकेली
मोड़ था कुछ अजीब तब
और ज़िन्दगी बनी थी पहेली।
उस समय वो निकला भीड़ से
कि उस सा हमदर्द कोई है ही नहीं...

वैसे तो सिर्फ परिचय था
पर आया वो भगवान बनकर
अपनों से भी जब हार चुकी थी
तब आया वो इंसान बन कर
वो अजनवी जो हाथ थाम लिया तो
लगा उस सा अपना कोई है ही नहीं...

उसकी ज़िन्दगी में आया वो कुछ ऐसे
पतझड़ के बाद आई हो बहार जैसे
सोची न थी कि मिलूँगी कभी मैं किसी से
यूँ अचानक मिला वो खुशी की बौछार जैसे
मिलते ही उस पर निसार हो गई
कि उस सा जना कोई है ही नहीं...

वो दोस्त बना फिर यार बना
धीरे धीरे दुनिया संसार बना
खो दी खुद की सुध बुध भी
ना जाने कब वो प्यार बना
जो छुआ उसने तो सहम गई
कि उस जैसी छुअन कहीं है ही नहीं...

वो छूता रहा वो पिघलती रही
संग उसके गहराई में उतरती रही
सम्भलना जो चाही तो उसने रोक दिया
एक आग थी जिसमें वो जलती रही
जलकर के भी वो खुशी मिली
कि उस खुशी की सीमा कोई है ही नहीं...

जिसे प्यार के रूप में देखती रही
वो प्यार नहीं एक छलावा था
एक आवश्यकता थी जो वो पूरी किया
जिसे प्यार समझा वो बस दिखावा था
आवश्यकता थी तुम मेरा प्यार नहीं
वो सुनकर भी चुप पड़ी रही
कि उस सा हार्ड कोई है ही नहीं...

ना रोई कभी ना बात किया
वो सबसे अच्छा था यही कह कर याद किया
वो खेला उसके रूह जिस्म से
फिर भी उसने उसे माफ किया
जब भी सुनी तारीफ सुनी
कि उस सा इंसान कोई है ही नहीं...

वो घुटती रही अपने अंदर
दर्द का लिए गहरा समंदर
दिखाती जितनी भी हार्ड वो खुद को
पर दबाए है कितना बड़ा बवंडर
मुस्कराने को ऐसे मुस्कराती है
कि उस सा खुश कोई है ही नहीं...

पर बातों की गहराई में
एक दर्द मुझे भी दिखता है
कहना नहीं कुछ उसके बारे में
पर बातों में सिर्फ वही रहता है
शब्दों पर नियंत्रण लगाके सोचती
कि उस सा समझदार कोई है ही नहीं...

देखी हैं मैंने वो छलकती आँखें
दर्द हैं जिसमें उसी के नाम का
बातें भी जो सुनती हूँ उसमें
फर्क नहीं उसके किसी काम का
बहाने भी ऐसे बनाती है
कि उस सा दिमागदार कोई है ही नहीं...

वो जो छोड़ दिया कुछ ऐसे
और बातें भी करीं दिल तोड़ने वाली
एक बार न पूछा इसकी मर्जी
और वजा भी दी बिखरने वाली
आवश्यकता जरूरत नीड बता दिया
कि इसके पास तो दिल है ही नहीं...

शायद लड़कों की यही फितरत होती है
वो जुड़ते हैं बस नीड पूरी करने को
कोई पत्थर नहीं यहाँ दिल भी है
जो धड़कता है सिर्फ प्यार करने को
वो कहती है कोई फर्क नहीं
जो कदर नहीं तो नहीं सही
सहती है सब कुछ अकेले छिपाकर
कि उस सा बहादुर कोई है ही नहीं...

कोई और होती तो शिकायत करती
क्यूँ तूने इंसान नहीं समझा
समझा अपनी आवश्यकता का साधन
और क्यूँ मेरा प्यार नहीं समझा
पर तू लड़की क्या अजीब चुप है
कि उस सा गूँगा कोई है ही नहीं...

जब भी मैंने उससे बात किया
बहाना देकर हमेशा टाल दिया
कहती कोई फर्क नहीं उसके जाने से
सिर्फ मैंने ही शायद उससे प्यार किया
जाने वाले को रोकते नहीं
और रोकने से कोई रुका है क्या
मान गई मैं भी अब तो
कि उस सा समझदार कोई है ही नहीं....।

Tuesday, 17 December 2019

क्यूँ है

ऐसा क्यूँ है
तू गया तो मगर
मुझमें ही समाया क्यूँ है

मेरे दिन रात में जाने
अपनी दुनिया बसाया क्यूँ है

बेघर हो जा
आजाद करदे मुझे
क्या जाने कितनी तड़प है
मुझे यूँ तड़पाया क्यूँ है...

याद तेरी जब जब आती
क्या बताऊँ नहीं कब कब आती
बता दे क्या खता मेरी
मुझे यूँ रुलाता क्यूँ है...

जब जाना ही था मुझे छोड़के यूँ
रहना था जब मुँह मोड़ के यूँ
बस इतना ही बता दे मुझे
फिर मेरी दुनिया में आया क्यूँ है

मैं नहीं थी कोई हुस्नपरी
तू नहीं था कोई शहज़ादा
मैं सिम्पल सी एक लड़की थी
मुझे ऐसी बनाया क्यूँ है

बहुत खुश थी अपनी ज़िन्दगी में
रहती थी शिव की बंदगी में
पथभ्रष्ट मुझे करके यूँ
यू मुझको रुलाया क्यूँ है

इंतजार का लम्बा रोग लगा के
कहाँ गया तू जोग लगा के
जी नहीं लगता तेरे बिना
मुझे जोगन बनाया क्यूँ है

कब आएगा तू ही जाने
क्यूँ गया कभी न बताया ये
मैं खुद में ही तड़पती रही
तू मुझे यूँ सताया क्यूँ है

हर दिन बीते तुझसे मेरे
तेरे नाम से रातें कटती हैं
तेरा नाम ही बस रटती रहती
यूँ पागल बनाया क्यूँ है

बस इतना मुझको बता दे तू
क्या सच में मुझसे प्यार भी था
या मैंने ही बस प्यार किया
फिर तेरा साया मुझ पर क्यूँ है

Thursday, 5 December 2019

मेरा लड़की होना मुझ पर भारी पड़ा

मुझ जीती जागती इंसान का
कोई स्तित्व ही नहीं है
मेरा लड़की होना मुझ पर
हमेशा से ही भारी रहा।

जो किस्सा शुरू किया तो
जन्म से करते हैं
जब पता चला कि
आने वाला है कोई दुनिया में
तो पहचान लड़के से मिली
जो आई इस दुनिया में
तो सात गज धरती ही नीचे धस गई
ऐसा नहीं मेरे आने की खुशी नहीं थी
लेकिन लड़का हुआ होता
तो और भी अच्छा होता

तू क्या जाने

तू क्या जाने जब किसी को मान लो दिल से अपना जब बन जाये बस वही आखिरी सपना तो अधूरेपन का अहसास होता है जब वो नहीं अपने साथ होता है। तू क्य...