मुझ जीती जागती इंसान का
कोई स्तित्व ही नहीं है
मेरा लड़की होना मुझ पर
हमेशा से ही भारी रहा।
जो किस्सा शुरू किया तो
जन्म से करते हैं
जब पता चला कि
आने वाला है कोई दुनिया में
तो पहचान लड़के से मिली
जो आई इस दुनिया में
तो सात गज धरती ही नीचे धस गई
ऐसा नहीं मेरे आने की खुशी नहीं थी
लेकिन लड़का हुआ होता
तो और भी अच्छा होता
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