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Tuesday, 17 December 2019

क्यूँ है

ऐसा क्यूँ है
तू गया तो मगर
मुझमें ही समाया क्यूँ है

मेरे दिन रात में जाने
अपनी दुनिया बसाया क्यूँ है

बेघर हो जा
आजाद करदे मुझे
क्या जाने कितनी तड़प है
मुझे यूँ तड़पाया क्यूँ है...

याद तेरी जब जब आती
क्या बताऊँ नहीं कब कब आती
बता दे क्या खता मेरी
मुझे यूँ रुलाता क्यूँ है...

जब जाना ही था मुझे छोड़के यूँ
रहना था जब मुँह मोड़ के यूँ
बस इतना ही बता दे मुझे
फिर मेरी दुनिया में आया क्यूँ है

मैं नहीं थी कोई हुस्नपरी
तू नहीं था कोई शहज़ादा
मैं सिम्पल सी एक लड़की थी
मुझे ऐसी बनाया क्यूँ है

बहुत खुश थी अपनी ज़िन्दगी में
रहती थी शिव की बंदगी में
पथभ्रष्ट मुझे करके यूँ
यू मुझको रुलाया क्यूँ है

इंतजार का लम्बा रोग लगा के
कहाँ गया तू जोग लगा के
जी नहीं लगता तेरे बिना
मुझे जोगन बनाया क्यूँ है

कब आएगा तू ही जाने
क्यूँ गया कभी न बताया ये
मैं खुद में ही तड़पती रही
तू मुझे यूँ सताया क्यूँ है

हर दिन बीते तुझसे मेरे
तेरे नाम से रातें कटती हैं
तेरा नाम ही बस रटती रहती
यूँ पागल बनाया क्यूँ है

बस इतना मुझको बता दे तू
क्या सच में मुझसे प्यार भी था
या मैंने ही बस प्यार किया
फिर तेरा साया मुझ पर क्यूँ है

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