तू क्या जाने
जब किसी को मान लो दिल से अपना
जब बन जाये बस वही आखिरी सपना
तो अधूरेपन का अहसास होता है
जब वो नहीं अपने साथ होता है।
तू क्या जाने
कि जब आदत हो जाए किसी के आहट की
सिहरन सी उठे और बढ़ जाए घबराहट सी
अब बस याद रहे वो बीता पल
आश में एक दिन आएगा वो कल
तू क्या जाने
कि जब दिल धड़कने लगे बेसुमार
याद तेरी ही बस आए यार
अब भी जो धड़क जाए गलती से
यार आज़ाद करदे मुझे कट्टी से
तू क्या जाने
कि जब रातों में नींद नहीं आती
जागती रहती बस तेरी याद आती
जो छोड़ के गया है तो
जो कभी वापस आ गया तो...
तू क्या जाने
कि जब याद तेरी हद से बढ़ जाती है
तो शब्दों का सहारे काव्य रच जाती है
अहसासों का बखान कर
हल्का हो जाता है मन
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