भाई नहीं हूँ मैं तुम्हारा
ये सिर्फ एक वाक्य नहीं
ब्रह्मास्त्र था
जो फेका था तूने मुझ पर
परास्त हो गई न जाने कैसा
आस्त्र था...
कितनों ने मारे यही डायलॉग कई बार
जब भी कोई और कहे तू याद आया हर बार
पता नहीं क्यूँ सच माना तब तेरी बात को
और रोग लगा लिया मैंने उसी रात को
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