इश्क हमने किया पागलों की तरह
तुम ना समझे ये कैसी बेज़ारी है।
दिल तुम्हारे ही नाम पर धड़कता रहा
ये खता थी मेरी या कोई बिमारी है।।
मैं तुम्हारे लिए ऐसी जोगन बनी
औ तड़पती रही कि दुनियादारी है।
तुम ना समझे ये कैसी बेज़ारी है।
दिल तुम्हारे ही नाम पर धड़कता रहा
ये खता थी मेरी या कोई बिमारी है।।
मैं तुम्हारे लिए ऐसी जोगन बनी
औ तड़पती रही कि दुनियादारी है।
चल आज तुझे मैं याद करूँ
अपनी सारी ज़िन्दगी तेरे नाम करूँ
तू बेवफा निकला तो क्या हुआ
तुझ पर ही ए ज़िन्दगी कुर्बान करूँ।।
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