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Monday, 14 October 2019

तेरे काबिल ही न थी

मैं तो तेरे काबिल ही न थी
पर तूने क्यों यह रोग दिया।
मैं भूल गयी खुद की हस्ती
तूने क्या यह जोग किया।।

मैं तितली थी एक स्वच्छ गगन की
तूने कैदी क्यूं बनाया मुझे।
फूलों की ही बस प्यास  थी
बगिया का सपना क्यूं दिखाया मुझे।।

तू माली है या भँवरा है
या एक नादान बच्चा।
तू माने या न माने
मेरा अहसास बिलकुल सच्चा।।

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