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Wednesday, 23 October 2019

Love shayries

कोई वक्त नहीं जब तुम याद न आओ
तुम्हीं बताओ मैं किधर जाउंगी
चाह मेरी तुम ही तो थे
तुम साथ नहीं तो मैं मर जाउंगी।।

शून्य हो गई है मेरी चेतना
तुम नहीं तो बताओ क्या हूँ मैं??

तुम क्या थे हम समझ न सके
और तूने हमें समझा ही नहीं।।

कोई बता दे प्यार क्या है
मौसम है हवा है
या उठते हाथों की दुआ है
कोई तो बता दे प्यार क्या है??

हम तो ऐसे न थे जैसा तुमने बना दिया
क्या खता हुई हमसे जो ऐसा बदला लिया।।

हमें तो तुम जैसे ही मिलेंगे
हम जैसा तुम्हें कहीं नहीं मिलेगी
जो छोड़ चले जाओगे हमें ऐसे तो
ढूढने पर हमारी राख भी नहीं मिलेगी।।

हर गली घूमी हर शहर घूमी
तेरी यादों ने पीछा न छोड़ा मेरा
थक न जाऊँ कहीं इस दुनिया से मैं
तू बता कौन है मेरा तेरे सिवा।।

बेशर्म हो गई मैं और मेरी मोहब्बत तेरे लिए
और तुझे तो कुछ फर्क ना पड़ा।।

क्या मिला बता मुझ उड़ते पंक्षी को कैद कर के
और छोड़ा भी तब जब उड़ना भूल गई।।

दर्द मेरा कुछ ऐसा है कि
न सहते बने न किसी से कुछ कहते बने।।

जिसे भूलने में जमाने लगे
वो मिला भी तो अजनबी बनकर
हम देखते रहे नयन भर के
और वो निकला ऐसे राहजबीं बनकर।।

आँखिया थक गई तेरा इंतजार करते
हम मिट गए तुझे प्यार करते
तुम यूँ निकले हरजाई सनम
काश एक बार ही सही प्यार का इजहार करते।।

एक भ्रम है जिसे तोड़ना नहीं चाहती
तू साथ नहीं ये मानना नहीं चाहती
सब कुछ तो खत्म हो गया है मेरा
एक यकीन है जिसे तोड़ना नहीं चाहती।।

याद आया आज वो बीता हुआ दिन
जब तुम साथ थे फिर भी हम अकेले थे।।

हर रोज़ एक अनजाने
सफर की हमसफर हूँ
साथ है जमाने की भीड़
औ मैं सबसे बेखबर हूँ।।

हर तरफ है बस तेरा नज़ारा
मैं भी तेरी दिल भी तुम्हारा
लेने पड़े सौ बार जनम भी
नहीं होगा कोई तुम बिन हमारा।।

एक दर्द सा है सीने में
जो तीर सा चुभता है मन में
कोई दवा नहीं कोई दुआ नहीं
बस साथ चाहिए जीवन में।।

क्या कहूँ किससे कहूँ
न अपना कोई न पराया है
बस दर्द से रिश्ता मेरा
और यही मेरा सरमाया है।।

कहने वाले तो कुछ भी कह दें
एक बार भी नहीं सोचते
सुनने वाला पत्थर का तो नहीं।।

इतना प्यार करूंगी तुझको
खुद पागल हो जाउंगी या
पागल मैं कर दूंगी तुझको।।

कुछ बातें हैं अधूरी
कुछ बातें अनकही सी
तू भी रहा खामोश
हमने भी ना कुछ कही थी
वक्त था चला गया
बस याद है तेरी छवी ही।।

तुम्हारा एक छण का मुस्कुराना
दिल में ख्वाहिशें जगाता है हजार
जब ना उम्मीद हो जाती हैं ख्वाहिशें
तो एक छण को क्यूँ मुस्कुरा जाते हो यार।।

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