इस बेगानी दुनिया में
न जाने हम क्या हो गए
हमसफर ढूढते रहे
और हम ही खो गए।
न मिले तुम
न खुद को ढूढ पाए
तन्हा सफर है
अब कैसे जिया जाए।।
दुनिया की भीड़ है
भीड़ का मेला है
लाखों हैं साथ फिर भी
ए दिल अकेला है।।
जब दर्द हद से बढ़ जाए
खून के आँसू दिल से बाहर आए
तो शेयर करो किसी अजनबी से
जो तुम्हें जानता न हो
क्योंकि दर्द में हँसने वाले अक्सर
पहचान वाले ही होते हैं।।
डर लगता है तुम जैसे भँवरे से
हम फूलों की हस्ती ही मिटा देते हो
फिर भी सोचते हो अहसान किया हम पर
जो हमें खुद से ही चुरा लेते हो।।
जो तुम न मिलते तो कहाँ जाते
इस अंधेरी दुनिया में कहीं खो से जाते
तुम मिले तो साथ हम भी कदम बढ़ा दिए
वर्ना तुम्हारे इंतजार में उम्र भर के लिए यहीं सो जाते।।
मुझे पास्ट नहीं बनना था यार
खुद से ज्यादा करती हूँ तुमसे प्यार
क्यों अहसास नहीं होता तुझे मेरी मोहब्बत का
एकबार कह तो सही तेरे लिए छोड़ दूँ ए दुनिया संसार।।
अजीब है तुम्हारा अहसास।
इग्नोर करते हो फिर भी
मन खिचा जाता है तुम्हारे पास।।
दिल मेरा पतंग है और डोर तेरे हाथ में
उडूँ आसमाँ में और रहूँ तेरे साथ में
डर लगता है मुझे भी तुझसे दूर होने से
ग़र गिरूं आसमां से तो मिलूँ तेरे पाथ में।।
किस अजीयत से गुजर रही
तुझे नहीं है खबर।
सामने है दुनिया
और मैं हूँ बेखबर।।
तुम्हें क्या पता के मैं कैसे जी रही हूँ।
तूने आग लगाई और मैं अब तक सुलग रही हूँ।।
चाहा तो बहुत के भूल जाएं तुम्हें
तुम हो कि भूलते नहीं....
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