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Thursday, 23 January 2020

पत्नी सा अधिकार भी देते

पति के जैसा प्यार चाहिए था
तो पत्नी सा अधिकार भी देते
कोई अंगुली ना उठा पाता मुझ पर
ऐसा तुम सम्मान भी देते.

बातों से मन भरता नहीं अब
मुझे छूने का अधिकार चाहिए
प्यार करो बेहद मुझसे तुम
रिश्ते का वही विस्तार चाहिए
जी जाऊँ मर करके भी
ऐसा तुम मुझे प्यार भी देते
कोई अंगुली ना उठा पाता मुझ पर
ऐसा तुम सम्मान भी देते.

तो करो ना कुछ ऐसे जतन
कि टूट जाएं सारे बंधन
मैं तुझमें मिल जाऊँ ऐसे
हो जाए गंगा यमुना का संगम
मैं खो जाती तेरे रंग में
कोई ऐसा रंग तुम डाल तो देते
कोई अंगुली ना उठा पाता मुझ पर
ऐसा तुम सम्मान भी देते.

किस अधिकार से तुझमें समाऊँ मैं
बता हक तुझ पर कैसे जताऊँ मैं
प्यार काफी है तुझे छूने को.. हाँ
प्यार की गारण्टी बता किसे बनाऊँ मैं
चाह भी है और प्यार भी है
इस प्यार को तुम पहचान तो देते
कोई अंगुली ना उठा पाता मुझ पर
ऐसा तुम सम्मान भी देते.

तुमसे प्यार करती हूँ मैं जानती हूँ
मेरे परिवार की भी इज्जत है मैं मानती हूँ
मुझे तो चाहिए तुम दोनों का प्यार
किसी एक को भी नहीं हारना मैं चाहती हूँ
हाँ चाहत है गर ओयो की तो
सिन्दूर बिन्दी संग लाल चुनरी सर पे डाल तो देते
और मेरी भी मर्यादा है
इसका तुम सम्मान तो करते
कोई अंगुली ना उठा पाता मुझ पर
ऐसा तुम सम्मान भी देते.

पति के जैसा प्यार चाहिए था
तो पत्नी सा अधिकार भी देते
कोई अंगुली ना उठा पाता मुझ पर
ऐसा तुम सम्मान भी देते.

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