रानी बना कर रखने वाला
यूँ अजनबी मुझसे हो गया कैसे
जो कहता था मर जाऊँगा तेरे बिना
यूँ भूलकर मुझे जी रहा होगा कैसे
कहता था कदमों में दुनिया झुका दूँ
तू कह ज़रा खुद को तुझ पे लुटा दूँ
ये दुनिया कुछ भी नहीं मेरी तेरे सिवा
तू छोड़के जो जाएगा तो खुद को मिटा दूँ
जो लिखा था उसने खुद से ही
उसे खुद ही मिटाया होगा कैसे
जो कहता था मर जाऊँगा तेरे बिना
यूँ भूलकर मुझे जी रहा होगा कैसे
मैं तो अबोध थी बड़ी नादान भी
जो उसकी हर बात को सच मानी
जो वजह भी बताई होती मुझे छोड़ जाने की
हाँ मैं उसे भी सच ही मानती
पर जाने से पहले एक लफ्ज न बोला
मेरी गलतियों का कोई राज न खोला
फिर भी माफी तो मैंने माँगी थी
तब भी वो न जाने चला गया कैसे
जो कहता था मर जाऊँगा तेरे बिना
यूँ भूलकर मुझे जी रहा होगा कैसे
उसे बेवफा कहूँ या खुद को गुनहगार
जानेसे पहले बताया तो होता क्या है मेरा अपराध
या तुम्हारी भी आदत थी नैपकिन सी लड़कियाँ बदलने की
या अब फीका लगने लगा था तुम्हें मेरा प्यार
आई तो होंगी और भी लड़कियाँ तुम्हारी ज़िन्दगी में
बाहों में लेते उन्हें मेरी याद ना आई होगी कैसे
जो कहता था मर जाऊँगा तेरे बिना
यूँ भूलकर मुझे जी रहा होगा कैसे
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