पागल हैं नादान हैं दोस्त मेरे
पूछते हैं क्या लिखती हूँ मैं
उन्हें क्या पता किसी ने दर्द दिया है ऐसा
उसे ही कलम से कहती हूँ मैं...
कहता है तुझसे दिल मेरा
तू आ तो जरा करीब में
तेरे नाम खुद की जिन्दगी कर
तुझे बसा लूँ अपने नसीब में...
कहने को तो दुनिया में
प्यार ही प्यार है
लेकिन कोई सच्चे प्यार का
पता बता दे...
मेरे प्यार की दास्तान
अधूरी जो रह गई
पूरी दुनिया अब
अधूरी ही लगती है...
चाहतें बदली हैं
बदलनी भी चाहिए
तुझे बदल के भी
मुझे तुझसा ही चाहिए...
सोचा था तेरे प्यार में
गौरी बनूँगी रुक्मिणी बनूँगी
देख ना मैं तो मीरा
और राधा बन गई...
नहीं भूलती तेरे चेहरे की मासूमियत
क्या था तुझमें जो हो गई है ऐसी मोहब्बत
सोचा नहीं था कभी कि ऐसा भी दिन आएगा
इश्क की सजा मिलेगी नहीं होगी कोई भी मुरौवत.
मैं आशिक आवारा
कोई पागल प्रेमी नहीं
मैंने दिल हारा है
तुझे पाने को...
कहीं दूर बैठा जब मुझे तू याद करता है
मेरा दिल क्यों बेशुमार धड़कता है
मेरे याद करने से तेरा दिल भी धड़कता क्या
या मेरा दिल ही तुझसे इतना प्यार करता है...
जिससे बंध चुके हम दोनों
समझ नहीं आता कि कैसी डोर है ये
दिखाई तो नहीं देती बस महसूस होती है
कितना स्ट्राँग सॉफ्टवेयर है ये...
ऋदम की कमी है न सुर है न ताल है
लोग कहते हैं मेरी कविताएं फिर भी बेमिसाल हैं
तारीफ नहीं ये बस छोटा सा बहाना है
मैं गालिब तो नहीं फिर भी आ रहा शर्माना है...
किसने मुझे यूँ याद किया
दिल मेरा क्यूँ धड़क रहा
अक्स तेरा बस आया पहले
दूसरे कहीं मैं बिमार तो नहीं...
छोड़ न जो हुआ, हुआ अब माफ कर
जो बिखरे हैं दिल के रिश्ते उसे साफ कर
सच्ची मोहब्बत का क्या कहें तुझसे
जो भी हो अब मेरा भी इंसाफ कर...
चल देखेंगे हम भी तेरी औकात
जितने आँसू आँखों में आए
एक एक का बदला ना लिया
तो हम भी तेरे आशिक नहीं...
क्या कहूँ कि दिल मेरा
तेरे बिना कहीं लगता नहीं
तू बस चुका है ऐसे
कोई और अब बसता नहीं...
साँवली सी सूरत तेरी
आँखें हैं शराब सी
होठ तेरे मधुशाला जैसे
बातें लाजवाब सी...
मेरी दुनिया में जब से आया है
कुछ बाकी ना रहा जो पाना है
मृगतृष्णा मन भटक रहा
तुझसे ही प्यास बुझाना है...
चंचल नदिया सी मैं बहती
मस्ती में चली थी झूमती
छितिज के हर मोड़ पर
अपने गगन को चूमती...
तू आया तूफां आया
दिल में हजारों अरमां लाया
कुछ कही अनकही बातों का
तू सिलसिला जवां लाया...
अब दर्द भी है और तड़प भी है
तुझसे मिलने की कसक भी है
तुम कहो या कुछ ना कहो
तुमको ही पाने की सनक भी है...
तुम जैसे किसी की चाहत थी
तुम सा ही किसी की आस भी थी
मिलने को तो बहुत मिले
पर तुम जैसे की ही प्यास भी थी...
प्यास बुझी ना अधरों की तो
मन की क्या बात करें
मैं प्यासी मृगनी दर दर भटकूँ
तुझ मरीचिका की क्या बात करें...
दिल कतरा कतरा बिखर गया
ये दर्द मेरा असह्य सा है
ओ सौदाई क्यूँ ना समझा
कि तू ही मेरा हृदय सा है...
नज़रें मेरी अब ढूढ रही
तू बता छिपा है किस कोने में
क्यूँ विरह का मुझको दर्द दिया
क्या मिलता है तुझे मेरे रोने में...
तस्वीरें तेरी बस देख कर
सुकून सा मिलता है मुझको
तेरा बस चले तो मिटा दे वो भी
यूँ तड़पा कर क्या मिलता है तुझको...
चाहती तो मैं भी हूँ
कि भूल जाऊँ तुझे
पर दिल है की
मानता नहीं...
तेरी एक मुस्कान पर
कुर्बान मेरी ज़िन्दगी थी
औ तूने मुस्कान के लिए
मेरी ज़िन्दगी माँग ली...
चुभ रहा मेरे दिल में तू
रह रह कर न जानें क्यूँ
प्यार था तू मेरा
नासूर कैसे बन गया...
अजीब खेल है खुदा का
जो किस्मत में नहीं होते
उनसे प्यार और नफरत
बेहद हो जाती है...
आँखें बंद करती हूँ तो
तेरा चेहरा ही बस नज़र आता है
जैसे पूरी दुनिया
अंधेरी और निरस हो गई है...
आज कल की दुनिया में
ये प्यार तो बहुत आम है
और तू है कि मुझमें
मुझसे ज्यादा खास है...
हाथ से छुआ होता तो
ज़िन्दगी आसान होती
अहसासों से छूकर
क्यों तिल तिल मार रहे हो...
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