चलना है साथ हमको तेरे उम्र भर यूँ हीं
कि मेरी ज़िन्दगी में तुझ सा कोई नूर नहीं
बेदर्द मोहब्बत का हवाला दे रही ज़िन्दगी
किस्मत का क्या करें, तेरा कोई कुसूर नहीं...
वक्त है बहुत कम और जाना है बहुत दूर
कुछ रोड़े हैं कुछ पत्थर है कुछ हम भी है मजबूर।
बस जिद है पागलपन है कुछ करने का हटकर
जानते हैं आसान नहीं है फिर भी जाना है बहुत दूर।
ये जो हो रहा ना हुआ कभी
जाना मर रहे हैं तेरे खयाल में
क्या खता हुई मुझसे ऐ मालिक
यही पूछते हैं हर सवाल में...
दूरियाँ उसकी बड़ी तड़पा रही
मेरी जान छीन के ले जा रहीं
क्या करूँ दर्द सहा जाए ना
फिर उसे न क्यूँ भूला पा रही...
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