तुम कौन पिया
जो न जाने दर्द मेरा
मैं सुलग रही
तेरे इंतजार में।
क्यों छुपा है यूं
तेरी चाह में दिल डूबा है यूं
कुछ होश न
न खबर मुझे
मैं क्यों पड़ी तेरे प्यार में।।
मैं सोचती एक बस तुझे
तू मेरी रूह का सुकून है
मैं ढूढती फिर रही तुझे
हर गली हर बाजार में।
जो मिले मुझे
मैं छीन लूं तुझे
फिर फैसला हो मेरी मोहब्बत का
उस खुदा के दरबार में।।
जो न जाने दर्द मेरा
मैं सुलग रही
तेरे इंतजार में।
क्यों छुपा है यूं
तेरी चाह में दिल डूबा है यूं
कुछ होश न
न खबर मुझे
मैं क्यों पड़ी तेरे प्यार में।।
मैं सोचती एक बस तुझे
तू मेरी रूह का सुकून है
मैं ढूढती फिर रही तुझे
हर गली हर बाजार में।
जो मिले मुझे
मैं छीन लूं तुझे
फिर फैसला हो मेरी मोहब्बत का
उस खुदा के दरबार में।।
No comments:
Post a Comment