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Monday, 14 October 2019

dil ke zazbaat

कोई शब्द नहीं जो
मेरे दिल के अरमां बयां करे
मैं खुदगर्ज सही
दोस्त हूँ खुद की
सुनती हूँ खुद की
वर्ना मैं भी फूल हँ
कुचले जाने में देर नहीं...

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जो भिगा दे तन मन मेरा
वो बारिश बन जाओ।
जो सोने ना दे रातों को
वो ख्वाहिश बन जाओ।।

सोच के डर लगता है बड़ा
ना आजमाइश बन जाओ।
दिल चाहे हर वक्त तुम्हें
वो फरमाइश बन जाओ।।

****************

जाने तू या जाने ना
मेरा दिल माने ना
मैं हूँ तेरी सनम
मुझे क्यूं पहचाने ना।

कभी रोती मैं रातों में
कभी हँसती मैं ख्वाबों में
मैं करूं क्या बता
मेरा दिल कुछ जाने ना।।

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