नाम था मेरा भी
अब गुमनाम हो गई।
एक ज़िन्दगी थी
वो भी तेरे नाम हो गई।।
अब गुमनाम हो गई।
एक ज़िन्दगी थी
वो भी तेरे नाम हो गई।।
लाख पहरे बिठाए थे
मैंने खुद पर
फिर भी न जानें मैं
कैसे बदनाम हो गई।।
एक ज़िन्दगी थी
वो भी तेरे नाम हो गई।।
मैंने खुद पर
फिर भी न जानें मैं
कैसे बदनाम हो गई।।
एक ज़िन्दगी थी
वो भी तेरे नाम हो गई।।
हाल अपना मैं कैसे
बयान करूँ
कब दिन गुजरा
कब शाम हो गई।।
एक ज़िन्दगी थी
वो भी तेरे नाम हो गई।।
बयान करूँ
कब दिन गुजरा
कब शाम हो गई।।
एक ज़िन्दगी थी
वो भी तेरे नाम हो गई।।
रोती रही रात भर
मैं तेरे लिए
तुझसे प्रीत क्या जुड़ी
कि ज़िन्दगी हराम हो गई।।
मैं तेरे लिए
तुझसे प्रीत क्या जुड़ी
कि ज़िन्दगी हराम हो गई।।
एक ज़िन्दगी थी
वो भी तेरे नाम हो गई।।
वो भी तेरे नाम हो गई।।
लोग कहते थे एक दिन
नाम रौशन करेगी
देख तेरी वजह से
मैं भी आम हो गई।।
एक ज़िन्दगी थी
वो भी तेरे नाम हो गई।।
नाम रौशन करेगी
देख तेरी वजह से
मैं भी आम हो गई।।
एक ज़िन्दगी थी
वो भी तेरे नाम हो गई।।
तूने प्रेम में मुझको
जकड़ा कुछ इस तरह
ना चाहते हुए भी
मैं तेरी गुलाम हो गई।।
एक ज़िन्दगी थी
वो भी तेरे नाम हो गई।।
जकड़ा कुछ इस तरह
ना चाहते हुए भी
मैं तेरी गुलाम हो गई।।
एक ज़िन्दगी थी
वो भी तेरे नाम हो गई।।
लकीरें तो थीं हाथ में
पर किस्मत में थी
अलग सोचा था खुद को
औ मैं भी आवाम हो गई।।
एक ज़िन्दगी थी
वो भी तेरे नाम हो गई।।
पर किस्मत में थी
अलग सोचा था खुद को
औ मैं भी आवाम हो गई।।
एक ज़िन्दगी थी
वो भी तेरे नाम हो गई।।
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