मेरे हर जज्बात की खबर तुझे
फिर मुँह मोड़कर बैठा है क्यों।
तुझे चाहती मैं दिलोजान से
फिर अंजान तू बनता है क्यों।।
ये बता तूझे क्या खबर नहीं
तू ही मेरी दुनिया जहान है।
बस पूजती हूँ एक तुझे
मेरे दिल का तू अरमान है।।
खामोशी तेरी ऐ सनम
जीने नहीं देती मुझे।
तू अनमोल है मेरे लिए
यूं खो नहीं सकती तुझे।।
तू खुश रहे आबाद रहे
दिल से दुआ ए है मेरी।
मैं फूल हूँ उस बाग का
जो राह में बिछे हैं तेरी।।
फिर मुँह मोड़कर बैठा है क्यों।
तुझे चाहती मैं दिलोजान से
फिर अंजान तू बनता है क्यों।।
ये बता तूझे क्या खबर नहीं
तू ही मेरी दुनिया जहान है।
बस पूजती हूँ एक तुझे
मेरे दिल का तू अरमान है।।
खामोशी तेरी ऐ सनम
जीने नहीं देती मुझे।
तू अनमोल है मेरे लिए
यूं खो नहीं सकती तुझे।।
तू खुश रहे आबाद रहे
दिल से दुआ ए है मेरी।
मैं फूल हूँ उस बाग का
जो राह में बिछे हैं तेरी।।
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