जो मैं यूँ मुस्कुरा रही हूँ
क्या गम है जो छुपा रही हूँ।
ऐसी बेबसी का है ये आलम
फिर क्यूँ खिलखिला रही हूँ।।
एक नकाब है चेहरे पर
और दर्द से बिलबिला रही हूँ।
टूट चुकी हूँ अन्दर से
फिर भी क्यूँ खिलखिला रही हूँ।।
जो मैं ऐसे मुस्कुरा रही हूँ
क्या गम है जो छुपा रही हूँ।।
क्या गम है जो छुपा रही हूँ।
ऐसी बेबसी का है ये आलम
फिर क्यूँ खिलखिला रही हूँ।।
एक नकाब है चेहरे पर
और दर्द से बिलबिला रही हूँ।
टूट चुकी हूँ अन्दर से
फिर भी क्यूँ खिलखिला रही हूँ।।
जो मैं ऐसे मुस्कुरा रही हूँ
क्या गम है जो छुपा रही हूँ।।
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