चाहा तो था मैंने भी सनम
पर तुमने सिर्फ चाहत की।
एक बार तो करते प्यार मुझे
क्यों मेरी भावनाएं आहत की।।
गर तुझे जानती ओ बेदर्दी सनम
तो दिल तुझसे मैं लगाती ना।
ना डूबती इस गहरे भवर में
और कभी पछताती ना।।
पर तुमने सिर्फ चाहत की।
एक बार तो करते प्यार मुझे
क्यों मेरी भावनाएं आहत की।।
गर तुझे जानती ओ बेदर्दी सनम
तो दिल तुझसे मैं लगाती ना।
ना डूबती इस गहरे भवर में
और कभी पछताती ना।।
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